श्रीमती उमेश नाग जयपुर राजस्थान

दर्द तन या मन का हो,
दिल‌ व दिमाग में हो।
विशेषतौर पर किश्तों में
समावेश होता है,
केई लम्हों में हमें यह अनुभव होता है।
अंतराल में कभी कभी यह
होता है,
परन्तु अनुभव नही होता –
छुपा होता है।
चेहरे की छबी सब बता देती
हैं,
मुरझाया व सिकुड़न चेहरे
का सब राज खोल देती है।
नयनों की सजल प्रतिमा,
सारा दर्द बयां कर देती है।
हर जख्म से हमारी यारी है,
सहिष्णुता हमारी शक्ति है।
दर्द का हमें कोई परवाह –
नही,
मैंने ही दर्द को अपना साथी
बनाकर पाला हैं।

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