निकली जिसमें आनन्द ,
बचपन वाली बंदूक ।
और बचपन की ढेरों यादें ।
छोटे छोटे कपडे
छोटे छोटे टोपे।
रंग बिरंगे खिलौने
बच्चों वाला कंबल ।
दूध की बोतल
पानी वाला सिप्पर ।
नानी के बुने स्वेटर
दादी के बुने मोज़े ।
अ आ इ ई
वाली कॉपी ।
अपनी टेढ़ी मेढ़ी
ड्रॉइंग वाली कॉपी ।
मां ने सब
रखा था सँभाल ।
हां ये माँ का
ही था कमाल ।
खुलते ही वो संदूक ।
जिया बचपन को,
आनन्द फ़िर भरपूर