कविताएं

।।मैं एक कविता लिखता हूं।।
मैं…
खोजता हूँ खुद में… खुद को,
हर पल खुद को… झंझोड़ता हूँ!
उत्तर नहीं मिलता…
बस प्रश्न ही प्रश्न ,
और तब—
मैं एक कविता लिखता हूँ!! 🎤🔥
।।१।।

दुनिया की रीत समझने निकला,
पर खुद से अनजान रहा मैं।
अपनों के मेले में खोया,
अपने ही हाथों… घायल मैं!
टूटे मोतियों-सा बिखर जाता हूँ,
पर फिर भी…
हाँ फिर भी—
मैं एक कविता लिखता हूँ!! ,
।।२।।

न कोई उद्देश्य रहा,
न मिली कभी मंज़िल,
पर मिला तो कर्मों का वरदान मिला।
मां का आँचल, पिता की सीख,
वही सच्चा पहचान मिला।
उनके प्रेम का ऋण चुकाता हूँ,
जब जब कलम उठाता हूँ…
हाँ, तब तब—
मैं एक कविता लिखता हूँ!! 🌸
।।३।।

जीवन… कोई गुड़ियों का खेल नहीं,
ये तो तप की राह है, मेल नहीं।
कभी गिरता हूँ, कभी ठहरता हूँ,
फिर भी आगे बढ़ता हूँ!
विश्वास को दीप बनाकर,
अंधेरों में भी जलता हूँ…
क्योंकि—
मैं सिर्फ जीता नहीं,
मैं एक कविता लिखता हूँ!! ✍️